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The Best Motivational Story in Hindi #9 | साधु के नुस्खे ने जीना सीखाया | Moral Story in Hindi

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किसी नगर में एक व्यक्ति रहता था। उसने परदेश के साथ व्यापार शुरू किया। उसकी मेहनत फली, कमाई इतनी हुई कि उसकी गिनती धनि सेठों में होने लगी। उसके बाद उसने रहने के लिए महल जैसी हवेली बनाई। वैभव-विलास और बड़े परिवार के बीच उसका जीवन बड़े आनंद से बीतने लगा।

एक दिन किसी दूसरे नगर से उसका एक संबंधी उसके यहाँ आया। सेठ ने स्वागत किया उसके बाद दोनों बातचीत करने लगे। बातचीत के बीच उसने बताया कि उसके यहाँ का सबसे बड़ा सेठ गुजर गया। बेचारे की लाखों की धन–संपत्ति पड़ी रह गई।


यह बात तो सहज भाव से कही गई थी, लेकिन उस आदमी के मन को इस तरह से डगमगा गई, कि वह सोचने लगा "उस सेठ की तरह एक दिन मैं भी तो मर जाउगा।" उसी पल से उसे बार–बार मौत की याद सताने लगी। बार बार एक ही बात सोचता, "हाय मौत आएगी, मुझे ले जाएगी और सब कुछ यहीं छूट जाएगा।" धीरे-धीरे चिंता के मारे उसकी देह सूखने लगी। देखने वाले यही देखते कि उसे किसी चीज की कमी नहीं है। लेकिन उस पर उसके भीतर का दुख ऐसा था जो किसी से कहा भी नहीं जा सकता था। धीरे–धीरे वह बिस्तर पर पड़ गया। खूब सारा इलाज कराया गया, लेकिन उसका रोग कम होने की बजाय बढ़ता ही जा रहा था। किसी को कुछ समझ नहीं आ रहा था, कि क्या किया जाए?


फिर एक दिन होता यूँ है, कि एक साधु उसके घर पर आते है और उस आदमी से उसकी बेबसी के बारे में पूछते है। तब वह आदमी उसके पैर पकड़ कर रोते हुए अपनी व्यथा उस साधु महाराज को बताता है।


सुनकर वह साधु हँस पड़े और बोले, ‘‘तुम्हारी व्यथा का इलाज तो बहुत आसान है।’’

उस आदमी के खोए जज़्बात मानो लौट आए। बड़ी आतुरता से उसने पूछा, ‘‘बताइये स्वामीजी, वह इलाज क्या है?’’

साधु ने कहा, ‘‘देखो, मौत का विचार जब भी तुम्हारे मन में आए, तब जोर से कहो, जब तक मौत नहीं आएगी, तब तक मैं खुलकर जीऊँगा। इस नुस्खे को सात दिन तक आजमाओ, मैं अगले सप्ताह फिर आऊँगा।’’


साधु की आज्ञा मानकर उस आदमी ने यह नुस्खा तुरंत आज़माना शरू कर दिया।


फिर सात दिन के बाद जैसे ही वह साधु महाराज वापस वहां आते है तो देखते हैं कि वह आदमी अपनी मानसिक व्यथा के चंगुल से बिलकुल बाहर आ गया है और बड़े आनंद के साथ रह रहा है। साधु को देखकर वह दौड़ा और उसके चरणों में गिरकर बोला, ‘‘महाराज, आपने मुझे बचा लिया। आपके बताए उपाय ने मुझ पर जादू जादू जैसा असर किया है। मैंने समझ लिया कि जिस दिन मौत आएगी, उसी दिन मरूँगा, उससे पहले नहीं।’’


साधु ने कहा, ‘‘वत्स! मौत का डर सबसे बड़ा डर है। मौत उतनों को नहीं मारती, जितनों को वह डर मारता है।’’


यहाँ इस कहानी में तो दुनिया के सबसे बड़े डर बारे में बात की है। ऐसी चीज का डर जिसका सामना हर जीव को कभी-न-कभी तो करना ही होगा। फिर भी इससे न डर कर खुल कर अपनी ज़िन्दगी हम जी सके ऐसा उपाय हो सकता है तो हमारे बाकी दूसरे सभी डर का सामना करने का इलाज भी बेशक मौजूद हो सकता है। लेकिन समस्या यह है कि हम ढूंढ नहीं पा रहे है। क्यों? क्योंकि हमारे दिमाग में हम उसी चीज़ के बारे में सोचते रहते है जो हमारा डर है। उसके इलाज के बारे में कभी नहीं सोचते।


याद रहे डर या कोई भी समस्या हो, जब तक आप उसी ख्याल को अपने दिमाग में पकडे रखेंगे तब तक आपको उसके हल के बारे में पता नहीं चलेगा। अगर हल पाना है तो आपको अपने डर को बाजु रख कर उस पर ध्यान देने की कोशिश करनी होगी जिससे आपका डर खत्म हो जाए। यह कहने जितना आसान तो नहीं है लेकिन हमें कोशिश ज़रूर करनी होगी। और जहां कोशिश होती है वहां उपाय भी होता है।


"Fear doesn't hurt as much as its thought makes it sad."


धन्यवाद।


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