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Stop Overthinking Motivational Blog in Hindi | Overthinking का Reason और हल।

Stop Overthinking Motivational Blog in Hindi | Overthinking का Reason और हल। #motivationalblogs #stopoverthinking #reasonsforoverthinking


हमारे दिमाग में हर रोज़ approx 6,200 Thoughts आते है! लेकिन ताज्जुब की बात यह है की हमें पता सिर्फ कुछ ही thoughts का होता है। इसका main reason है हमारी Consciousness. हम सिर्फ वही thoughts पर consciously attention देते है जो हमें हमारे लिए काम के लगते है। बाकी तो सब thoughts यूँ ही आते रहते है और अपने आप चले भी जाते हैं।

लेकिन कभी कभी कुछ thoughts हमें परेशान भी करते रहते है। वैसे होता कुछ नहीं है उन thoughts में लेकिन फिर भी कभी कभी उन्हें लेकर हम परेशान से हो जाते है। ये thoughts कुछ इस तरह के होते है, like... समजो की हम कहीं अच्छी और पवित्र जगह पर बैठे है, और कुछ वाहियात बातें या वाहियात ख्याल हमारे दिमाग में आ जाता है और हम फिर उन्हें रोकने की कोशिश करना चाहे तो भी रोक नहीं पाते। यानी ऐसी ऐसी thought patterns हमारा mind create करता है, जो हम नहीं चाहते लेकिन हमारे मन में आती रहती है।


कहीं बार हमारे साथ ऐसा होता है, कि हम जो नहीं चाहते वो thought आने लगते है ओर हम उन्हें भूलना या दूर करना चाहे तो वह दूर होने के बजाय और बढ़ते है! ज्यादातर मामलों में हमारे परेशान होने का कारण भी हमारे इस तरह के वाहियात thoughts ही होते है।


लेकिन आपको इसमें एक बात समझनी होगी, कि यह thoughts अपने आप चलते है मतलब की यह subconsciously हमारे mind में चलते रहते है, लेकिन Consciously हमें ऐसे thoughts से छुटकारा चाहिए होता है, उस चीज की वजह से ही हम bothered होते रहते है, और कभी कभी ऐसा होता है की ऐसे thoughts की वजह से हम पूरा अपना दिन confusion में बिताते है।


For example, हम अपने किसी important काम में अपना concentration दे रहे होते है और अचानक कोई ऐसा ख्याल like, किसीसे कुछ बहस हुई हो या फिर Girlfriend से झगड़ा हो गया हो, या हमने कुछ ऐसा देखा हो जो हमारी आँखों के सामने से दूर ही न हो पा रहा हो जैसी, recent या पुरानी moment हमारे दिमाग में उस हद तक आती रहती है कि हम कहाँ है वह भूल कर अपने ख्यालों में या तो deep में चले जाते है, या फिर उस ख्याल को रोकने या दबाने की कोशिश करते रहते हैं लेकिन ख्याल आने बंध ही नहीं होते, उल्टा और बढ़ जाते है!


अब इसके हल की बात करें, तो ख्याल आएगा कि हम हमारे thoughts को रोक दें! लेकिन क्या ये मुमकिन है?


नहीं! यह मुमकिन हो ही नहीं सकता, क्योंकि हमारा दिमाग बना ही इसी के लिए है, उनका काम ही है सोचना, Command करना और काम करना। इसलिए हम अपने thoughts को कभी नहीं रोक सकते, और न ही दबा सकते हैं। लेकिन, एक सच्चाई यह भी है, कि हमारे दिमाग में आ रहे unwanted thoughts हमें परेशान कर देते है, या कभी कभी हद से भी पार हो जाते है!


Thoughts आना वह हमारे दिमाग का natural काम है, लेकिन यह भी सच है की हमारा दिमाग thought को एक ही जगह टिकाये नहीं रखता वह तुरंत thoughts को ला कर उन्हें भगा भी देता है। मतलब, जैसे ही thought हमारे दिमाग में आता है, बिलकुल वैसे ही वह हमारे दिमाग से पानी के बहते प्रवाह की तरह चला भी जाता है। यह हमारे दिमाग की subconscious process है।


अब आप सोच रहे होंगे, अगर ऐसा है तो फिर कोई Unwanted thought हमारे दिमाग में टिक कर हमें परेशान कर दें ऐसा क्यों होता है?


इनका एक simple process है जो हम करते है, या फिर यह कहें कि हमारी consciousness हमसे करवाती है। हम बचपन से एक आदत बना लेते है, कोई भी चीज जो हमें बहुत पसंद है या कोई भी ऐसी चीज़ जो हमें बेहद न पसंद है इन दोनों को हम खुद हमारे दिमाग में गहराई तक बसा लेते है।


यह कुछ इस तरह से होता है For example, अगर कोई चीज ऐसी है जो हमें बेहद पसंद हो तो हम बार बार खुद ही उनके ख्याल जानबूझ कर अपने दिमाग में लाते रहते है। Same ऐसे ही, अगर कोई ऐसी चीज़ हम देखें जो हमें पसंद न हो या जिनसे हम नफरत करते हो तो वह भी हम अपने दिमाग में बार बार खुद से ही सोच के रूप में लाते रहते है और जाने अनजाने में अपने मन को sad या गुस्सैल बनाने की कोशिश करते है।


यह होता तो consciously ही है, लेकिन फिर भी हम इस process से अंजान रहते है, की कब हमने कुछ सोचा और हमारे ज़हन में उसे बसा लिया! यही वजह है की जब same ऐसा कोई thought हमारे दिमाग में आता है तो हम उन्हें positively या negatively repeat करते रहते है जिससे वह thought flow की तरह बह जाने के बजाए हमारे दिमाग में टिक जाता है जो फिर बहुत देर तक रहता है, या शायद तब तक नहीं निकल पाता जब तक कोई हल न मिले! और जितना हम इस thought को दूर करने की या इसे भागने की कोशिश करते है वह उतना ही और हमारे दिमाग में गहरा होता जाता है!


लेकिन फिर भी कोई तो इसका solution होगा, कुछ तो ऐसा होगा जिससे हम ऐसे कोई भी unwanted thoughts से छुटकारा पा सकें।


Solution तो है, लेकिन उसके लिए आपको कुछ ऐसे तरीके अपनाने होंगे:


सबसे पहले तो आपको अपने thoughts को लेकर एक ऐसा ठोस mindset अपनाना होगा, जब भी कोई thought आपके दिमाग में आए जो आपके लिए unwanted हो तो उन्हें छेड़े नहीं! In the sense, thought को ना ही दबाने की कोशिश करें और नहीं उन्हें दूर भगाने या इससे छुटकारा पाने की कोशिश करें। जो भी thought है उसे अपने दिमाग में पूरा as it is आने दे और कोई ऐसा reaction न दें जो आपके emotions से निकल रहा हो। चाहे जितना भी अच्छा या जितना भी वाहियात thought हो आपको बस उन्हें उसी हिसाब से ही चलने देना है, खुद से कुछ add नहीं करना।


ऐसा करने से आप खुद यह realize करेंगे, कि आपका thought धीरे धीरे कम होता जाएगा और flow की तरह बहता महसूस होने लगेगा। यह कहने में तो आसान है लेकिन real में थोड़ा-बहुत मुश्किल है। यह depend करता है आपके दिमाग की power पर।


कुछ tips है जिनसे आप यह कर सकतें है:


जब भी आप किसी काम में मश्गूल हो तब काम करने के साथ music भी चलाएं, ऐसे songs play करे जो आपको बेहद पसंद हो और उन्हें अपने साथ दोहराते हुए अपना काम जारी रखे। ऐसा करना आपको अपने काम के साथ present और focused बनाए रखेगा ताकि आप कोई और चीज़ में अपने आपको divert न करें।


अगर कभी ऐसा हो, कि आप free बैठे हो या enjoy कर रहे हो, और तब कोई unwanted thought आपके दिमाग में आए तो और कुछ न करें, बस एक दौड़ लगाएं और तब तक दौड़े जब तक आपकी सांसें फूलने न लगे। जब सांस फूलने लगे तब आप कोई पास की जगह या bench पर आसमान की और मुँह रख कर तब तक बैठे रहें जब तक आपकी सांसे फिर से normal न हो जाएं। ऐसा करने से आपका दिमाग बिलकुल peaceful और thought free होकर present moment में आ जाता है जो आपके लिए अपने unwanted thoughts से छुटकारा पाने के साथ साथ आपकी सेहत के लिए भी काफी फायदेमंद होता है।


और एक बात आपको अपने आपको ठीक से समझानि होंगी, कि जो भी thought आपके दिमाग में आते है वह जरूरी नहीं है की आपसे relate करते हो, वह आपकी दिमागी process है जिनका आपकी consciousness यानी आपकी real life से दूर-दूर कोई ताल्लुक नहीं है। बस इतना अगर आप ठीक से समझ गए तो फिर कुछ और सोचने या समझने की ज़रुरत ही नहीं पड़ेगी।


"The thoughts coming in our mind can be ours but they cannot be us."


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