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How Your Friends Put You in Bad Habits | Habits Motivational Blog in Hindi | संगती और आदत।

How Your Friends Put You in Bad Habits | Habits Motivational Blog in Hindi | संगती और आदत। #motivationalblogs #habitmotivation #motivational2022


यह बात सच है कि हम अलग अलग nature के है, लेकिन एक चीज़ हम सब में common होती है जो है, See, Think, Observe & Follow.

जो चीज़ हमें भए जो अच्छा लगे चाहे वह सही में अच्छा हो या बुरा जो भी हो उसे देख कर उसके बारे में सोच कर उसे बार बार deeply observe करके उस चीज़ को हम खुद भी आज़माने लगते है और बार बार अज़माते रह कर उसे हम हमारी आदत बना लेते है।


एक नन्हे से Baby से लेकर एक Kid, और एक Kid से लेकर एक Teenager, और एक Teenager से लेकर Young Age में आने तक हम में काफी सारे बदलाव होते है। इस बदलाव में एक चीज़ जो बहुत major effect करती है वह होती है हमारी आदतें। कुछ आदतें हमने खुद से पाई होती है और बाकि सारी आदतें हमारे आसपास के माहौल से हमें मिलती है जिसमें include होती है हामरी family, हमारे friends, हम जिसे follow करते है वे।


इसमें सबसे बड़ा role अगर किसी का होता है तो वह है हमारा Friends Circle, एक तरह से कहा जाए तो हमारी संगत। हमारी आदतें चाहे बुरी हो या अच्छी इन सब से कहीं न कहीं हमारी संगत जुडी होती ही है। क्योंकि, बचपन से हम family या जितनी भी और चीज़ें है उन सबसे ज़्यादा time हमारे friends के साथ ही बिता रहे होते है। जब school में होते है तब आधा दिन school और tuition classes में बीतता है, और बाकि बचा time भी हम friends के साथ खेलने कूदने या घूमने में लगाते हैं। जब बड़े होते है तब वही same चीज़ college में होती है। So हमारे young age में आने तक का पूरा अरसा हमारे friends से ज़्यादा जुड़ा हुआ होता है। और उस से जुड़ी होती है हमारी आदतें।


अगर हमने अच्छी आदतें पाई हो तो वह बेहद अच्छी बात है, like, अपने आपको जैसे है वैसा पेश करना, दूसरों से खुदको compare करने के बजाए खुद के पास जो है वह बेहतर समझ कर उस के साथ आगे बढ़ना, अपने रहन-सहन को disciplined और extraordinary रखना, बुरी चीज़ें खाने से या ख़राब व्यसनी चीज़ों से दूरी बनाके रखना etc...।


लेकिन दिक्कत तब होती है जब life में कुछ ऐसी आदतें घर करें जो हमारे लिए हर तरह से बेहद हानिकारक हो, like, दूसरों से जलन होना, उनसे खुदको compare करके यह समझना जैसे हम उनके सामने कुछ भी नहीं है। Friends की बातो में आके वह सब करना जो हमें नहीं करना चाहिए like, नशे की लत, चाहे वह smoke हो drink हो या उसके ऊपर की कोई बेहद हानिकारक नशीली चीज़ें हो, फालतू night-out करके time pass करते रहना, जिसकी वजह से हमारे खुद के बहोत सारे काम ऐसे होते है जो हम important होने के बावजूद भी नहीं कर पाते है।


ऐसी आदतें हमारे अंदर रही self-control की कमी की वजह से बनती है, जो एक तरह से हमारा weak point है! और self-control की कमी इसलिए होती है क्योंकि हम खुदकी value नहीं जानते, हम खुदको दुसरो से कम आंकते है। हमें कहीं न कहीं यह लग रहा होता है कि हम दूसरों के सामने कुछ भी नहीं है चाहे वह हमारे friends हो हमारे आसपास के लोग हो या कोई और हो।


तभी तो जब कोई हमें ऐसी चीज़ बोलता है, like

"तू दारू नहीं पीता? Cigarette नहीं पीता? दूध पिता बच्चा है क्या तू!

Late night out नहीं कर सकता! बस पूरा दिन पढाई करता रह, ज़िन्दगी भर किताबों में ही घुसा रहेगा बस! क्या ज़िन्दगी है बे तेरी! एक दम बिना दम की!

ठीक है यार थोड़ा careless हैं हम, चलता है! Just chill bro" Etc...


यही बातें सुन-सुनकर आप खुद पे शक करने लगते है, सामने वाले को खुद से ज़्यादा value दे देतें है और अपना self-control loose करके वही सब चीज़े करने लगते है जो आपके साथी या दोस्त आपको करने को बोलते है।


क्या यह अच्छी बात है? नहीं न! फिर भी हम खुदको बर्बादी की और धकेलते है! हम यह समझ ही नहीं पाते कि हमारे लिये सही क्या है और गलत क्या है! सिर्फ एक ही चीज़ की वजह से, हमारी संगत।


दूसरों की बातों में आकर कुछ भी करने से पहले आप एक बार खुद से पूछो,


"क्या यह करना मेरे लिए सही होगा?

अगर में एक बार ऐसा करता हु तो सच में कोई फरक नहीं पड़ेगा?

कहीं यह करने के पीछे में खुदको बेहतर इंसान दिखाने की आड़ में खुदको बेवकूफ तो नहीं बना रहा हूँ?"


इनका आपको positive या negative कोई भी जवाब मिले लेकिन जब वह जवाब आपको यह feel न करवाए की आप इस जवाब से दिल से satisfied हो तब तक यह सवाल बार बार खुदसे करते रहो। आप ज़रूर यह realize करोगे की जो habits आपके लिए सही नहीं है वह आपको थोड़ी सी भी नहीं अपनानी चाहिए। अगर अपनाने जाओगे भी तो आपको कहीं न कहीं आपके अंदर का ज़मीर आपको यह आवाज़ देगा की, "यह मत करो!"


सबसे पहले तो आप खुदको दूसरों से कम आंकना बंद करो। कुछ लुभावना देखकर खुदको बेतुके logic से मनाने की कोशिश मत करो। अपने आपसे ईमानदारी बरतो। आप अपने आप में एक बेहद ही उम्दा इंसान है। आपकी कुछ self-respect है जो आप खुदको दूसरों से compare करने की आड़ में खोते जा रहे हो ऐसी वाहियात habits अपनाकर।


"यह मत करो!"

बस एक बार इस आवाज़ को अगर आपने पहचान लिया तो समझो कोई बुरी आदत आपको छू तक नहीं पाएगी! खुदको देखो, सोचो आप क्या करने आये हो यहाँ पर और क्या कर रहे हो? अगर खुदको दूसरों के सामने बेहतर दिखाना ही है तो कुछ ऐसी habits के साथ दिखाओ जो genuine है। लेकिन यह आप तभी कर पाएंगे जब आप खुद की नज़रों में valuable होने के साथ-साथ खुद से ईमानदार होंगे। चाहे आदत हो या कोई भी और चीज़ हो, सही-गलत के फैसले में एक चीज़ बेहद ज़रूरी है जो आपको हमेशा बरक़रार रखनी होगी, वह है आपकी खुद के प्रति ईमानदारी।


"Whether it is a habit or whatever else, one thing that is very important in the decision of right and wrong that you must always maintain is your honesty to yourself."


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